बंगाल में महासंग्राम

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान आज सुबह 7 बजे से शुरू हो चुका है। राज्य की 142 सीटों पर हो रहे इस मतदान में जनता न केवल अपना प्रतिनिधि चुन रही है, बल्कि बंगाल के अगले पांच सालों का भविष्य भी तय कर रही है। आज हर तरफ एक ही चर्चा है— बंगाल में महासंग्राम: किसका होगा राज्याभिषेक?

मतदान की शुरुआत और दिग्गजों की अपील

​सुबह की पहली किरण के साथ ही मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से बंगाल की जनता, विशेषकर महिलाओं और युवाओं से रिकॉर्ड संख्या में मतदान करने की अपील की है। पीएम ने कहा कि आपका एक वोट लोकतंत्र को मजबूत करेगा। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी लोगों से बढ़-चढ़कर लोकतांत्रिक उत्सव में हिस्सा लेने का आह्वान किया है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस बार का मुकाबला बेहद कड़ा है, जिससे यह सवाल गहरा गया है कि बंगाल में महासंग्राम: किसका होगा राज्याभिषेक?

चुनावी मैदान के प्रमुख चेहरे

​दूसरे चरण में कई हाई-प्रोफाइल सीटों पर नज़रें टिकी हुई हैं।

  1. ममता बनर्जी (भवानीपुर): मुख्यमंत्री खुद अपने गढ़ भवानीपुर से मैदान में हैं। उन्होंने सुबह-सुबह विभिन्न पोलिंग बूथों का दौरा किया और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
  2. शुभेंदु अधिकारी: भाजपा के कद्दावर नेता और विपक्ष के चेहरा शुभेंदु अधिकारी ने भी अपनी जीत का दावा ठोक दिया है।
  3. ​महुआ मोइत्रा: टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने नदिया के करीमपुर में मतदान किया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

इन बड़े चेहरों की साख दांव पर होने के कारण गलियारों में बस यही गूंज रहा है— बंगाल में महासंग्राम: किसका होगा राज्याभिषेक?

भाजपा बनाम टीएमसी: तीखी बयानबाजी

​चुनाव के बीच जुबानी जंग भी अपने चरम पर है। भाजपा उम्मीदवार बिमान घोष ने टीएमसी को ‘प्राइवेट लिमिटेड कंपनी’ करार देते हुए कहा कि इस चुनाव के बाद इस कंपनी पर ताला लग जाएगा। दूसरी ओर, टीएमसी नेताओं ने भाजपा पर केंद्रीय बलों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। जमीन पर वोटरों का उत्साह देखकर यह साफ है कि लड़ाई आर-पार की है। इस माहौल ने जनता को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बंगाल में महासंग्राम: किसका होगा राज्याभिषेक?

मुख्य मुद्दे और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

​इस बार बंगाल चुनाव में मुख्य रूप से रोजगार, महिला सुरक्षा, संदेशखाली जैसे विवाद और ‘माटी-मानुष’ की अस्मिता बड़े मुद्दे रहे हैं। चुनाव आयोग ने हिंसा को रोकने के लिए चप्पे-चप्पे पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की है। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है। शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है, क्योंकि इस शांति के पीछे छिपा है वह बड़ा सवाल— बंगाल में महासंग्राम: किसका होगा राज्याभिषेक?

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मतदान का प्रतिशत और जमीनी हकीकत

​दोपहर तक के आंकड़ों के अनुसार, मतदान का प्रतिशत काफी उत्साहजनक रहा है। ग्रामीण इलाकों में शहरी क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा जोश देखा जा रहा है। पानीहाटी सीट से भाजपा उम्मीदवार रत्ना देबनाथ, जो आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले की पीड़िता की मां हैं, उन्होंने भी अपना वोट डाला। उनके चुनाव लड़ने ने इस मुकाबले को और अधिक भावनात्मक और राजनीतिक बना दिया है। ऐसे में हर नागरिक की जुबान पर यही है— बंगाल में महासंग्राम: किसका होगा राज्याभिषेक?

अंतरराष्ट्रीय ध्यान और पूर्व राजनयिकों का मत

​दिलचस्प बात यह है कि बांग्लादेश में भारत के अगले उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने भी कोलकाता में मतदान किया। उन्होंने इसे लोकतंत्र का महान उत्सव बताया। बंगाल की भौगोलिक स्थिति और इसके राजनीतिक प्रभाव के कारण पड़ोसी देश भी इस चुनाव पर नजरें गड़ाए हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी सुर्खियां बनी हुई हैं कि आखिर बंगाल में महासंग्राम: किसका होगा राज्याभिषेक

क्या कहते हैं शुरुआती रुझान?

​हालांकि आधिकारिक नतीजे आने में अभी समय है, लेकिन वोटरों की खामोशी ने दोनों ही खेमों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। टीएमसी जहां अपनी ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं के भरोसे चौथी बार सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रही है, वहीं भाजपा ‘सोनार बांग्ला’ के नारे के साथ पहली बार सत्ता की सीढ़ी चढ़ने की कोशिश में है। विश्लेषकों का कहना है कि यह चुनाव बंगाल की राजनीति की दिशा और दशा बदल देगा। जनता की खामोशी के बीच बस यही शोर है— बंगाल में महासंग्राम: किसका होगा राज्याभिषेक?

निष्कर्ष: फैसले की घड़ी

​शाम 6 बजे तक चलने वाले इस मतदान के बाद ईवीएम में प्रत्याशियों की किस्मत कैद हो जाएगी। ममता बनर्जी का करिश्मा चलेगा या मोदी की गारंटी बंगाल में कमल खिलाएगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन एक बात तो तय है कि 2026 का यह चुनाव दशकों तक याद रखा जाएगा। हार-जीत के दावों के बीच अंतिम सत्य बस यही है कि फैसला जनता के हाथ में है।
​अंतिम दौर की वोटिंग खत्म होने के साथ ही पूरे देश की निगाहें अब परिणाम पर टिकी हैं, क्योंकि सबको जवाब चाहिए कि बंगाल में महासंग्राम: किसका होगा राज्याभिषेक?

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