संदीप पाठक

भारतीय राजनीति के इतिहास में कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जो रातों-रात पूरे देश का राजनैतिक नक्शा बदल देती हैं। आम आदमी पार्टी के शीर्ष रणनीतिकार और राज्यसभा सांसद डॉ. संदीप पाठक का अचानक पाला बदलना भी एक ऐसी ही घटना है। संदीप पाठक: बड़ा उलटफेर की इस खबर ने न केवल दिल्ली और पंजाब की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि विपक्षी एकता के दावों पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। डॉ. पाठक, जिन्हें आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर रहने का गौरव प्राप्त है, उन्हें अरविंद केजरीवाल की टीम का ‘चाणक्य’ माना जाता था। उनके भाजपा में शामिल होने के फैसले ने राजनैतिक विशेषज्ञों को भी अचंभित कर दिया है।

 

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 25 अप्रैल 2026 को हुई, जब संदीप पाठक ने राघव चड्ढा के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस कदम को केवल एक नेता का पार्टी छोड़ना नहीं, बल्कि एक विचारधारा के पतन के रूप में देखा जा रहा है। संदीप पाठक: बड़ा उलटफेर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पाठक वह व्यक्ति हैं जिन्होंने 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में संगठन की ऐसी बुनावट की थी कि स्थापित दल धराशायी हो गए थे। अब वही रणनीतिकार भाजपा के पाले में खड़ा है, जो पंजाब में अपनी जमीन तलाशने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही थी।

 

हालांकि, राजनीति में कोई भी बदलाव इतना सरल नहीं होता। जैसे ही डॉ. पाठक ने भाजपा का दामन थामा, उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब पुलिस ने संदीप पाठक के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। इन मामलों में एक भ्रष्टाचार से संबंधित है और दूसरा महिला शोषण जैसे गंभीर आरोपों पर आधारित है। संदीप पाठक: बड़ा उलटफेर के बाद उन पर गैर-जमानती धाराएं लगना यह संकेत देता है कि आने वाले दिन उनके लिए संघर्षपूर्ण होने वाले हैं। पंजाब पुलिस की एक टीम उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दिल्ली स्थित उनके आवास पर भी पहुँची थी, जिससे तनाव और बढ़ गया है।

 

संदीप पाठक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘बदले की राजनीति’ का हिस्सा बताया है। उन्होंने एक बयान में कहा कि जब तक वे आम आदमी पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे, तब तक वे पूरी तरह निष्कलंक थे, लेकिन भाजपा में जाते ही उन पर पुराने और मनगढ़ंत आरोप लगा दिए गए। संदीप पाठक: बड़ा उलटफेर के समर्थकों का मानना है कि यह सब उन्हें मानसिक रूप से तोड़ने और भाजपा में उनकी बढ़ती सक्रियता को रोकने की एक साजिश है। उनका कहना है कि वे किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं क्योंकि उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है

राजनैतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि संदीप पाठक अकेले नहीं गए हैं। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 11 में से 7 सांसदों के टूटने की खबरें आ रही हैं। यदि ये खबरें सही साबित होती हैं, तो ‘आप’ के लिए संसद के उच्च सदन में अपना अस्तित्व बचाए रखना मुश्किल हो जाएगा। संदीप पाठक: बड़ा उलटफेर इस लिहाज से भी ऐतिहासिक है कि इसने एक क्षेत्रीय पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली चुनौतियों के सामने ला खड़ा किया है। भाजपा इस मौके का उपयोग पंजाब में अपने कैडर को उत्साहित करने और आगामी निगम चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए करना चाहती है।

संदीप पाठक

 

​डॉ. संदीप पाठक के राजनैतिक सफर पर नजर डालें तो पता चलता है कि वे पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले व्यक्ति रहे हैं। मार्च 2022 में उन्हें गुजरात का प्रभारी बनाया गया था और पंजाब में सह-प्रभारी के तौर पर उन्होंने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ा। उनकी कार्यशैली वैज्ञानिक और डेटा पर आधारित रही है। अब संदीप पाठक: बड़ा उलटफेर के बाद भाजपा के भीतर उनकी भूमिका क्या होगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। क्या भाजपा उन्हें पंजाब में अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाएगी या फिर उन्हें केंद्रीय संगठन में कोई बड़ा पद देकर पूरे उत्तर भारत की कमान सौंपी जाएगी?

 

इस राजनैतिक लड़ाई के बीच कानूनी लड़ाई भी तेज होती दिख रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि भ्रष्टाचार और महिला शोषण के आरोप बेहद संवेदनशील होते हैं और यदि पुलिस के पास पुख्ता सबूत हुए, तो पाठक को जेल भी जाना पड़ सकता है। संदीप पाठक: बड़ा उलटफेर के बाद जिस तरह से पुलिस सक्रिय हुई है, उससे साफ है कि राज्य सरकार इस मामले को ढीला नहीं छोड़ना चाहती। वहीं भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व पूरी तरह से डॉ. पाठक के बचाव में उतर आया है और इसे लोकतंत्र की हत्या करार दे रहा है।

 

 

 

अत: यह स्पष्ट है कि संदीप पाठक का यह निर्णय केवल उनके करियर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पंजाब और दिल्ली की भावी राजनीति का आधार बनेगा। दलबदल के इस खेल में कौन जीतेगा और कौन हारेगा, यह तो भविष्य ही बताएगा। लेकिन संदीप पाठक: बड़ा उलटफेर ने यह साबित कर दिया है कि राजनीति में न तो कोई स्थाई मित्र होता है और न ही कोई स्थाई शत्रु। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या संदीप पाठक इन कानूनी बाधाओं को पार कर भाजपा के लिए वही चमत्कार कर पाएंगे, जो उन्होंने कभी आम आदमी पार्टी के लिए किया था।

 

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